बहुत तलाशा उसको मेने,
देखा एक रोज आइना मेने,
समझ रहा था दिल मेरा,
न था यकीं पर सच है,
दूर किया मेने उसको वो,
वो यादो में आकर,
आज जाना की वो दर्द था,
जर्रे जर्रे में छुपा कहीं,
apne shabdo ko bunkar maine. dil ki kuch awaz likhi hai. aaye pasand aapko to bahut sukriya, maine bas pahli hi kosis kari hai.
रिमझिम बारिश जब होने लगी,
धरती भी देखो हसने लगी,
वो दूर गगन में छाए बादल,
हर कलि भी देखो खिलने लगी,
सारे बच्चे भी खुश हो गए,
वो हर दिल फ़िर मुस्कुराने लगे,
रिमझिम बारिश जब होने लगी.................
सूरज भी न जाने कहा गया.........
वो भी कुछ मदहोश हो गया,
इस बारिश की आहट से,
वो भी बदलो में खो गया॥
सायद सूरज की किरणे भी।
इस मस्ती में खोने लगी।
रिमझिम बारिश जब होने लगी...
इन खेतो में भी हरियाली छाने लगी,
हवांए भी गीत गाने लगी,
नदियों को नई उमंग मिली,
लहरों को नया एहसास मिला॥
मोसम ने अपना रुख बदला,
रिमझिम बारिश जब होने लगी॥
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है,
सुबह सुबह ये बनकर कोई मधुर धुन,
मुझको प्यार से जगाने आती है,
हौले से ये आकर मुझको कुछ कह जाती है,
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है.........
बनके ये घनघोर घटाए,सूरज को छुपा लेती है।
कभी कभी ये बनके बादल धरती को भीगा देती है,
कभी ये बनके ओस की बुँदे मोती सी बन जाती है,
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है........
कभी कभी ये लहराती सी मुझको बैचैन कर देती है,
कभी तेजी से आकर ये जुल्फों के संग खेलती है,
मेरे हाथो को छुकर ये कुछ एहसास करा जाती है,
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है........
कभी ये बनके बारिश मुझको खुश कर जाती है,
कभी चलती है मस्त होके मुझको संग ले जाती है,
न जाने ये आकर पास कितने संदेश दे जाती है,
दूर है जो अपने हमसे , उनको पास ले आती है।
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है..........
रातो को ये थाप्किया देकर मुझको सुलाती है,
अपनी बांहों में लेकर मुझको माँ से मेरे मिलाती है ,
जब हौले से चलती है कोई गीत सुना जाती है
जब सो जाती हूँ में,ये मुझको झुला झुलाती है
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है................
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है..................
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है,


