Sunday, February 1, 2009

"पाने की चाहत"

किसी को खो दिया हमने,
किसी को पा लिया हमने,
जाने कहा चले थे हम,
की अपनों का साथ खो दिया हमने,
जिंदगी में ख्वाबो को पाने की चाहत थी,
आज उन ख्वाबो को भी छोड़ दिया हमने,
किसी को खो दिया हमने,
किसी को पा लिया हमने,........

तुम्हे पा लिया तो जी जायंगे हम,
अगर न मिले तो भी तुम्हे पाएंगे हम,
हार मनाकर ज़िन्दगी जी सके तो,
हर जिंदगी को जीत जायेंगे हम,
सपने पुरे हो न हो,
उन्हें एक दिन पाएंगे हम,
देखे है सपने अगर दिल से,
तो उन्हें भी पुरा कर जायेंगे हम,
क्यों सोचे की क्या खो दिया हमने,
की क्या पा लिया हमने,

टूटकर अगर शाखा किसी पेड़ की,
उस पर वापस न जुड़ सके तो क्या,
उसी टूटी शाखा से सपनो का महल बनायेंगे हम,
क्या पता इसी तमन्ना में,तुम्हे भी पा जाए हम,
अपनी चाहत को न कम होने दिया हमने,
क्यों सोचे की क्या खो दिया हमने,
की क्या पा लिया हमने,
सच कहा है किसी ने....................ये सच ही तो है दोस्तों की........
चाहत किसी को मजबूर करती तो नही...
किसी को "पाने की चाहत" दिल से निकलती तो नही...

4 comments:

  1. टूटकर अगर शाखा किसी पेड़ की,
    उस पर वापस न जुड़ सके तो क्या,
    उसी टूटी शाखा से सपनो का महल बनायेंगे हम,
    क्या पता इसी तमन्ना में,तुम्हे भी पा जाए हम,
    वाह क्या अलग सोच से बुनी है यह रचना
    बहूत खूब

    ReplyDelete
  2. keep it up .......... and regular .........on blog

    ReplyDelete