Friday, January 30, 2009

सूरज की किरणे

सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है,
देख इस मधुर मिलन को चिड़िया गाने गाती है,
इन किरणों की चमक से ही खेत सुनहरे लगते है,
सुनकर आहट इन किरणों की सोते सपने जगते है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है ...........



जागते है सोये फूल जब किरणों से सबेरा होता है,
तब ही खुले आसमान में पंछियों का डेरा होता है,
चलती है ठंडी पवन भी लहराती अपनी ही धुन में कंही
.और नदिया भी कुछ गुनगुनाती है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
दिन भर में इनके साथ रहती हूँ,
इनसे कुछ बातें करती हूँ।
शाम आते ही ये छुप जायंगी...
कल ये फ़िर से आएँगी .....
न जाने क्यों मन में नई तरंगे आती है...सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
इन किरणों की रोशनी में सब कुछ अच्छा लगता है
दूर होता है हर अँधेरा और रोशन जंहा दीखता है,
नई उमंगें नई तरंगे हर दिल में आ जाती है,
हर होंटो पर ये बनके हँसी छा जाती है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
सूरज की चंकल किरणे जब धरती से मिलने आती है ,,,,,,,,,,

7 comments:

  1. sundar rachna,

    badhaii sweekaren.

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  2. सूरज की चंचल किरणें...............यहाँ वहां कहाँ कहाँ तक जाती है.............और किरणों को आपकी कविता समेट कर हम तक लाती है..........!!

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  3. न जाने क्यों मन में नई तरंगे आती है...सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
    सुंदर विचार, बहुत पोजिटिव कविता, उमंग से भरी, अच्छा शब्द विन्यास..........
    बहुत अच्छा लगा पढ़ कर
    स्वागत है आपका

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  4. bahut achcha..
    kabhi yahan bhi aaye..
    http://jabhi.blogspot.com

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  5. रसात्मक और सुंदर अभिव्यक्ति

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