रिमझिम बारिश जब होने लगी,
धरती भी देखो हसने लगी,
वो दूर गगन में छाए बादल,
हर कलि भी देखो खिलने लगी,
सारे बच्चे भी खुश हो गए,
वो हर दिल फ़िर मुस्कुराने लगे,
रिमझिम बारिश जब होने लगी.................
सूरज भी न जाने कहा गया.........
वो भी कुछ मदहोश हो गया,
इस बारिश की आहट से,
वो भी बदलो में खो गया॥
सायद सूरज की किरणे भी।
इस मस्ती में खोने लगी।
रिमझिम बारिश जब होने लगी...
इन खेतो में भी हरियाली छाने लगी,
हवांए भी गीत गाने लगी,
नदियों को नई उमंग मिली,
लहरों को नया एहसास मिला॥
मोसम ने अपना रुख बदला,
रिमझिम बारिश जब होने लगी॥

रिमझिम बारिश जब होने लगी...
ReplyDeleteइन खेतो में भी हरियाली छाने लगी,
हवांए भी गीत गाने लगी,
नदियों को नई उमंग मिली,
लहरों को नया एहसास मिला॥
- प्रकृति - चित्रण के माध्यम से सकारात्मक सोच वाली कविता के लिए साधुवाद.