चले थे साथ हम,
पर राहो में खो गए,
आज पास आए थे मुद्त के बाद,
आज ही आपसे दूर हो गए,
क्यों मंजिल को साथ पा न सके,
बस वो बीते पल याद आ गए,
चले थे साथ हम,पर रहो में खो गए............
चाहतो का भवर था ये प्यार,
इस प्यार की कश्ती में सवार हो गए,
आया एक तूफान जिंदगी में ऐसा,
हम एक तिनके के सहारे हो गए है,
चले थे साथ हम,
पर रहो में खो गए...........
फूल न मिले तो क्या,
राहों में कांटे मिल गए,
देख रही थी मजिल पास में,
पर राहों के दिए ही बुछ गए,
चले थे साथ हम,
पर राहों में खो गए...................
अंधेरो में जिंदगी थी,
इस जिंदगी के गम से हम,
आज अचानक ही आमने सामने रूबरू हो गए,
कुछ यादे साथ लेकर हम,
उन यादों के सहारे हो गए,
चले थे साथ हम,
पर राहों में खो गए................
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bahut bahut achhi kavita hai kushi ji. mubarakbad.
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