चलते -चलते वक्त रुके,
लिखते-लिखते हाथ,
न जाने कैसा मोड़ आया,
क्यों लौट आया वो इन्तजार..........
चाँद भी निकला,तारे भी खिले,
सूरज चमक के निकला है,
फ़िर से दिल में टीस जगी,
क्यों लौट आया वो इन्तजार..........
हवाओं ने छु लिया फ़िर से,
घटाओ ने की फ़िर से बरसात,
देखो फ़िर आँखों ने झाल्काए जाम,
क्यों लौट आया वो इन्तजार ..........
में हँसती थी गाती थी,
खुशियों से जिया हर बार,
वो आयेंगे ये सोच खड़ी थी,
पर लौट आया वो इन्तजार.........
ठंडी हवाए आती थी,
पैगाम नया दे जाती थी,
बस दिल को मिलना था एक बार।
पर लौट आया वो इन्तजार,
क्यों लौट आया वो इन्तजार ................
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jane kyo kisi apne ka intjar hamesha rahta hai
ReplyDeletekisi ki yad dilati huyi khoobsoorat rachana.
---------------------------------------------------"VISHAL"
कभी कभी इंतज़ार का भी अपना मज़ा है ..अच्छा लिखा है आप ने ..बधाई
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