सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है,देख इस मधुर मिलन को चिड़िया गाने गाती है,
इन किरणों की चमक से ही खेत सुनहरे लगते है,
सुनकर आहट इन किरणों की सोते सपने जगते है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है ...........
जागते है सोये फूल जब किरणों से सबेरा होता है,
तब ही खुले आसमान में पंछियों का डेरा होता है,
चलती है ठंडी पवन भी लहराती अपनी ही धुन में कंही
.और नदिया भी कुछ गुनगुनाती है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
दिन भर में इनके साथ रहती हूँ,
इनसे कुछ बातें करती हूँ।
शाम आते ही ये छुप जायंगी...
कल ये फ़िर से आएँगी .....
न जाने क्यों मन में नई तरंगे आती है...सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
इन किरणों की रोशनी में सब कुछ अच्छा लगता है
दूर होता है हर अँधेरा और रोशन जंहा दीखता है,
नई उमंगें नई तरंगे हर दिल में आ जाती है,
हर होंटो पर ये बनके हँसी छा जाती है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
सूरज की चंकल किरणे जब धरती से मिलने आती है ,,,,,,,,,,

sundar rachna,
ReplyDeletebadhaii sweekaren.
achchi lagi kavita badhaee
ReplyDeleteसूरज की चंचल किरणें...............यहाँ वहां कहाँ कहाँ तक जाती है.............और किरणों को आपकी कविता समेट कर हम तक लाती है..........!!
ReplyDeleteन जाने क्यों मन में नई तरंगे आती है...सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
ReplyDeleteसुंदर विचार, बहुत पोजिटिव कविता, उमंग से भरी, अच्छा शब्द विन्यास..........
बहुत अच्छा लगा पढ़ कर
स्वागत है आपका
bahut achcha..
ReplyDeletekabhi yahan bhi aaye..
http://jabhi.blogspot.com
रसात्मक और सुंदर अभिव्यक्ति
ReplyDeleteBahut aacha
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