Saturday, January 31, 2009
वो इन्तजार
लिखते-लिखते हाथ,
न जाने कैसा मोड़ आया,
क्यों लौट आया वो इन्तजार..........
चाँद भी निकला,तारे भी खिले,
सूरज चमक के निकला है,
फ़िर से दिल में टीस जगी,
क्यों लौट आया वो इन्तजार..........
हवाओं ने छु लिया फ़िर से,
घटाओ ने की फ़िर से बरसात,
देखो फ़िर आँखों ने झाल्काए जाम,
क्यों लौट आया वो इन्तजार ..........
में हँसती थी गाती थी,
खुशियों से जिया हर बार,
वो आयेंगे ये सोच खड़ी थी,
पर लौट आया वो इन्तजार.........
ठंडी हवाए आती थी,
पैगाम नया दे जाती थी,
बस दिल को मिलना था एक बार।
पर लौट आया वो इन्तजार,
क्यों लौट आया वो इन्तजार ................
Friday, January 30, 2009
अनदेखी हवायें...
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है,
सुबह सुबह ये बनकर कोई मधुर धुन,
मुझको प्यार से जगाने आती है,
हौले से ये आकर मुझको कुछ कह जाती है,
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है.........
बनके ये घनघोर घटाए,सूरज को छुपा लेती है।
कभी कभी ये बनके बादल धरती को भीगा देती है,
कभी ये बनके ओस की बुँदे मोती सी बन जाती है,
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है........
कभी कभी ये लहराती सी मुझको बैचैन कर देती है,
कभी तेजी से आकर ये जुल्फों के संग खेलती है,
मेरे हाथो को छुकर ये कुछ एहसास करा जाती है,
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है........
कभी ये बनके बारिश मुझको खुश कर जाती है,
कभी चलती है मस्त होके मुझको संग ले जाती है,
न जाने ये आकर पास कितने संदेश दे जाती है,
दूर है जो अपने हमसे , उनको पास ले आती है।
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है..........
रातो को ये थाप्किया देकर मुझको सुलाती है,
अपनी बांहों में लेकर मुझको माँ से मेरे मिलाती है ,
जब हौले से चलती है कोई गीत सुना जाती है
जब सो जाती हूँ में,ये मुझको झुला झुलाती है
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है................
क्या है ये हवाए जो नज़र ही नही आती है..................
सूरज की किरणे
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है,देख इस मधुर मिलन को चिड़िया गाने गाती है,
इन किरणों की चमक से ही खेत सुनहरे लगते है,
सुनकर आहट इन किरणों की सोते सपने जगते है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है ...........
जागते है सोये फूल जब किरणों से सबेरा होता है,
तब ही खुले आसमान में पंछियों का डेरा होता है,
चलती है ठंडी पवन भी लहराती अपनी ही धुन में कंही
.और नदिया भी कुछ गुनगुनाती है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
दिन भर में इनके साथ रहती हूँ,
इनसे कुछ बातें करती हूँ।
शाम आते ही ये छुप जायंगी...
कल ये फ़िर से आएँगी .....
न जाने क्यों मन में नई तरंगे आती है...सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
इन किरणों की रोशनी में सब कुछ अच्छा लगता है
दूर होता है हर अँधेरा और रोशन जंहा दीखता है,
नई उमंगें नई तरंगे हर दिल में आ जाती है,
हर होंटो पर ये बनके हँसी छा जाती है,
सूरज की चंचल किरणे जब धरती से मिलने आती है........
सूरज की चंकल किरणे जब धरती से मिलने आती है ,,,,,,,,,,
Thursday, January 29, 2009
हिन्दुस्तान
क्यों है तेरा देश महान॥
क्या है तेरे देश में
क्या है ये हिन्दुस्तान
क्या कहती में उस नादान को,
जो न जाने की क्या है हिन्दुस्तान॥
समझया बस मैंने उसको वही जो जाने मेरा दिल और जाने ये सारा जन्हा
की क्या है ये हिदुस्तान की क्या है ये हिन्दुस्तान ......
हर दिल में जन्हा प्यार बसे।
मन्दिर मज्जिद साथ जन्हा।
हिंदू मुस्लिम का भेद नही।
बस वो ही मेरा हिदुस्तान ...
जो है वीरो की आन,
जो शहीदों की शान।
जिस पर मरता हर बच्चा बच्चा।
तिरंगा जिसकी है पहचान.
बस वो ही मेरा हिदुस्तान॥
हरे हरे है खेत जन्हा.
धूप में जन्हा खिलता किसान.
न झुकना सीखा है,
न दुश्मन से माने हार।
बस वो ही मेरा हिन्दुस्तान॥
जन्हा मिले तुम्हे राम रहीम।
जहा गुरुद्वारा भी दीख जाए॥
जन्हा मिले कुरान बाइबल ।
जन्हा हो संस्कृति का मिलान
बस वो ही मेरा हिदुस्तान
बस वो ही मेरा हिंदुस्तान
जो धरती को माँ कहता,
जो देश में रखता हो अपनी जान,
उस हर इंसान को कहते है हम हिदुस्तान।
जो लिखता है इतिहास लहू से,
जिसने पल में दे देये अपने प्राण,
उन सहीद जवानों की यादो में,
हर पल दीखता हिन्दुस्तान ॥
बॉर्डर पर खड़े है जो सैनीक ,
वो है मेरी देश की शान ,
उनकी रगो में बहता है लहू बनके,
देखो मेरा हिदुस्तान..बस ये ही है मेरा हिदुस्तान ,
बस ये ही मेरा हिदुस्तान ......
Sunday, January 25, 2009
Flower

IN WADIYON KO MAHKA GAYA PHOOL
SARE JAHAN KO KHILA GAYA PHOOL
KUCHH JAJBATO KO KAH GAYA TO,
KUCHH GAMO KO CHHUPA GAYA PHOOL
KUCHH ESHWAR KO CHAD GAYE

TO KUCHH KI KISMAT ME MURJHANA THA
KUCHH JAYMALA ME SAJ GAYE TO
KUCHH KO KISI KE SHAV SAJANA THA

KUCH SURAJ KI KIRANE CHU SAKE TO
KUCH KO CHAD KI CHADNI ME KHILNA THA
KUCH KALIYA HI TOOT GAI TO
KUCH KO PHOOL HI BANNA THA
KYA KISMAT HAI IN PHOOLO KI..
KYA RANG BHI PAYE HAI
EK DOSTI KO KAHTA HAI TO
DOOSRA PYAR ME SMAYE HAI..

STORY OF A FLOWER
